अंकल सेम की दुनिया में 23

 

कैसे कैसे लोग।

 

यूनाइटेड एयर लाइंस विश्व की बढिय़ा एयर लाइंस में एक है। एयरलाइंस खूबसूरत एयर होस्टेज के लिए प्रसिद्व है। कहा जाता है कि खूबसूरत लडकियां अब एयरलाइंस में होती है यहां बड़े अस्पताल में एयर लाइंस में यात्रियों को सुंदर सेवा उपलब्ध कराने के लिए। यात्रियों का यह ध्यान बांटने के लिए भी कि वे जमीन से ३०.३२ हजार फिट की ऊंचाई पर उड़ रहे हो। मौत के मुंह में। चालक की जरा सी चूक या प्लेन के किसी यंत्र की खराबी पूरी शरीर को छोटे छोटे टुकड़ो में बदल देगी। ऐसे टुकड़ों में जिन्हें देखकर कोई यकीन भी नहीं कर सकता कि यह मानव का शरीर होता। मानव ....टुकड़ो को देखने वाले सैकड़ो लोगों की चीख निकल जाएं या बेहोश हो जाएं।

अस्पताल में खूबसूरत नर्स इसलिए रखी जाती है ताकि आदमी अपनी पीडा भूल जाएं। अपने दुुख को उनकी खूबसूरती में भुला दे। कई बडे अस्पताल में जाने पर तो अब उनकी नर्स को देखकर ठीक होते है।...के बाद भी दिल करने लगता है कि दो चार दिन और यही रह लिया जाएं।

अस्पताल के मोटे बिल को भी नजर अंदाज कर दिया जाएं। फिल्मों में भी प्लेन में खूबसूरत एयर होस्टेज व नर्स दिखाई देती है दिल इन पर कुर्बान होने और अपने को न्यौछावर करने को होता है। किंतु इस एयरलाइंस में बिल्कुल उल्टा मिला।

दो एयरहोस्टेज भी बिल्कुल काली लंबी। दोनो की लंबाई सात फिट से ज्यादा ही होगी। दोनों ने काले कोट पहन रखे थे। काले हम निग्रो को कहते है। ये किस नस्ल से रही पता नही? एक के लंबे लंबे बाल थे। दो लंबी ... उसके चेहरे पर आकर पड रही थी। दांत लंबे। काले चेहरे पर ये दांत अलग से चमकते।

होटों पर ये उसने लाल लिपस्टिक लगा रखी थी। ओर गले में पहने थी सफेद मोतियों की चौड़ी मनके टाइप की माला। सच बिल्कुल अजीब लग रही थी। अंधेरे में दिखाई दे जाएं तो आदमी डर जाएं। उम्र ३०-३५ के आस पास होगी। हालांकि बात करते वह हंसती कई बाद खड़े खड़े हंसती किंतु उसकी हंसी कोई आर्कषण पैदा कर पाती।

इसी तरह की लम्बी काले रंग की एयरहोस्टेज की उम्र ५० साल के आसपास रही होगी। सिर पर एक सेटीमीटर से भी कम बाल लगता है कि बाल मशीन से कटवाएं गए होंगे। उसने कानों में कड़े जैसे चौड़े चांदी के बुंदे पहन रखे थे। कुंडल तो नहीं कहे जा सकते। क्या कहा जाता है मुझे याद नहीं। ये एयर होस्टेज सामान की ट्राली इधर से उधर ले जाती कई बार मेरे पास से गुजरी। हालांकि दोनों का मेरे से बात करने का मौका नहं मिला।

एक और होस्टेज थी गोरी,पतली, सुंदर चहरा लंबा। यह सफेद स्कर्ट और गले में सलैटी स्कार्फ बांधे थी। सिर पर इसके भी आधा सेटीमीटर के आसपास बाल होंगे। भारतीय ललनाएं लंंबे वालो के लिए प्रसिद्ध रही है। उनकी बालों की लंबी चोटी को कवियों ने नागिन कहा है। देखकर लगता भी ऐसा ही है। कहीं वेणी शब्द भी इसके लिए आया है। अब भारतीय नारी बाल कटाने लगी। अलग अलग डिजाइन में उन्हें सजाने संवारने लगी किंतु इतने छोटे बाल कोई भी भारतीय नहीं रखती। पतियों की मृत्यु हो जाने पर महिलाओं के सिर पर कहीं  कहीं उस्तरा फिरवाकर गंजा किया जाता है। एक दो भारतीय युवती भी ऐसी कभी मिली तो अलग ही नजर आई। पता चला। कि शरीर में कैंसर की कोशिकाएं विकसित होने पर उपचार के लिए की गई कीमो थेरेपी के दौरान उसके बाल उड़ गए है।

गंज सिर वाली तीन एयर होस्टेज को मुझे एक साथ एक फ्लाइट में देखने का पहला अवसर था। अपने मन में बसे सपनों ओर ... के विपरीत एयर होस्टेज को देखने का।

औसत दर्जे की एक ....एयर होस्टेज मुझे जरूर प्रभावित करती है। अमेरिकन महिला इस तरह से बात बनाएं है कि उसके बाई ओर के बाल बार बार आंखो के आगे आ जाते है वह बात बात पर हंसती और किसी किसी यात्री की कमर पर या गर्दन पर हल्की थाप मार देती। प्रेम और स्नेह के परिचायक के रूम मेंं।

नेवार्क एयरपोर्ट पर कस्टम चेक के बाद एयरलाइंस स्टाफ को सामान सौंपने के बाद। एक व्हील चेयर वाले सक गंतव्य पूछने पर वह में अपने साथ आने का कहता है। व्हील चेयर पर हाथ में छड़ी लिए एक वृद्ध बैठे है। हमारी ही तरह एक अन्य दंपत्ति भी उसके साथ है। गैलरी में थोडा चलकर लिफ्ट से वह हमें एक हाल में ले जाता है। यह नेवार्क का सिक्यूरिटी चैकिंग सेंटर है। लंबी लंबी लाइन लगी है। व्हील चेयर वाले की अलग से जाने की अनुमति है। वह हमें ले जाकर सबसे आगे लाइन में खड़ा कर देता है। हमे बताया गया है कि व्हील चेयर ले जाने वाला पांच डालर लेता है। मैं निर्मल से कहता है इसने हमारी करने के दो डालर दे देना। किंतु सिक्यूरिटी चेक के बाद वह नजर नहीं आता। उसी तरह जैसे भक्तों की मद्द के लिए आएं देवदूत उनकी मद्द कर अंर्तध्यान हो जाते है।

सिक्यूरिटी चेक के बाद वही मौजूद में एक अधिकारी को टिकट दिखा अपना गन्तव्य पूछ, वह लंबा चौड़ा काला शायद कोई निग्रो है। नीली ड्रेस पहन रखी है वह हमें समझाता है कि बाद में वह जाना कि हम उसकी बात नहीं समझ रहे है। एक भारतीय युवती को हमारी समस्या, समझ, हमें कहा जाना है, बताकर मद्द का अनुरोध करता है, और युवती के साथ हमें भेज देता है।

युवती गेट नं ७१ के एक यूनाइटेड एयरलाइंस के काउंटर पर वोर्डिग पास दिखाकर बात करती है। काउंटर को महिला के कहने पर हम वहीं बैठ जाते है। युवती तेज कदमों से चली जाती है। मैं आभार व्यक्त करने के लिए कुछ दूर उसका पीछा करता हूं किंतु उसकी स्पीड ज्यादा होने के कारण रूककर वापस लौट आता हूं। वह......कर पाता।

सिनसिनाटी एयरपोर्ट पर हम उतरे और कुछ लोगों के पीछे पीछे यह सोचकर चल दिए कि वे लगे लेेंगे। स्वचलित सीडिया़े से नीचे उतर आए। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें। निर्मल ने एक भारतीय महिला से पूछा वह मद्द करना चाहती थी किंतु उसकी ५-६ साल की बिटिया स्वचलित पथ पर आगे निकल गई थी, इसलिए उसे जाना पडा।

यहां एक पतले अंग्रेज ने हमे पीछे आने का अनुराध किया। वह नीले रंग का घुटनो तक का कोट पहनने के कारण अच्छा लग रहा था वह कुछ तेज चल रहा था। निर्मल पीछे रह गई तो उसने पूछा प्लीज गिव मी बैंग मेरे और निर्मल के मना करने पर वह स्वचलित जीने पर सवार हो गए। हम उसके पीछे थे। उसकी सज्जनता भी हम मन ही मन प्रशंसा कर रहे थे। हम ऊपर फ्लोर पर पहुंचने के नजदीक थे। कि अंशुल दिखाई दे गया। हमने उसे थैक्स कहा और बताया कि किस ........और वह आगे बढ़ गया।

 

छोटा हिंदुस्तान।

 

एक पार्टी से लौटे है। अंशुल के साथ उसके दोस्त आ गए है वे चाय पी रहे है और वीडिो गेम खेल रहे है। शिल्पी और अंशुल के दोस्तों की पत्नियां गप्पियां रही है। समय ज्यादा होने के कारण मैं और निर्मल अपने कमरें में जाकर आराम करने लगते है। आज शुक्रवार है कल और परसो शाम शनिवार और रविवार को कार्यालय बंद रहते है। शुक्रवार और शनिवार को लोग देर रात मक जागते एवं एन्जुआए करते है। यहां दम्पत्ति को संतान होने की खुशी में पार्टी थी। अंशुल के कहे अनुसार तैयार होकर कैप आदि लगाकर हम अपार्टमेंट से निकले। निकलते ही सांस लेने में लगा की खांसी होगी। हवा बहुत ही बर्फीली और तीखी थी। पास ही में दूसरी सोसाइटी के कम्युनिटी सेंटर में दावत थी।

सेंटर में प्रवेश करती ही एक साइड की टेबिल पर जैकेट एवं कैप उतारकर रख दिए। ठंड रास्ते में ही लगती है कारों में हीटर चलते रहते है और भवनों मेंं भी। भवनों में अकेली शर्ट पहने ठंड का पता नहीं लगता ओर यह पता भी नहीं चल पाता कि बाहर शरीर को गला देने वाली शीत लहर चल रही है।

जैकेट आदि उतारकर हम वहां एकत्र समूह में शमिल हो जाते है। अंशुल के कई दोस्त और उनकी पत्तिनयों से हाय हेलो शुरू हो जाती है। कुछ नए मिलते है। तो वे अंशुल नमस्ते करते ही पूछ उठते है अंशुल के पापा है ना? वास्तव में अंशुल के सर्किल में सबको पता है कि उसके मम्मी पापा हाल में ही आए है। जो मिलता है वह यही पूछता है। सफर कैसा रहा? कोई परेशानी तो नहीं हुई। जैट लेक से मुक्ति मिली या नहीं आदि आदि । अंशुल और शिल्पी भी कुछ से परिचय कराते है। कुछ युवत युवतियां पूछती है। थोडी देर में हम घुल मिल जाते है। अंशुल के एक मित्र की पत्नी हमें समोसा लाकर देती है। प्लेट में समोसे के साथ खट्टी मीठी चटनी भी है। वह साइड में रखी एक थोडी सब्जी जैसी वस्तु को दिखाकर कहती है अंकल ये अचार है हाथ का बना इंडिया से आया है।

पार्टी में सब युवक युवतियां बतिया रही है। एन्जुआए कर रहे है कुछ बडे बच्चे मिलकर खेल रहे है छोटे बच्चों के साथ उनके मम्मी पापा लगे है।

पूरे ग्रुप में ८०-९० के करीब युवक युवतियां होंगे। सब इंडियन। शिल्पी बता चुकी है कि हमारी अमेरिकन से किसी का कोई संबंध नही है। आफिस मं ही बातचीत होती है, उसके बाद नही किसी के घर आना जाना और मिलना जुलना हम पसंद नहीं करते। अंशुल बताता है कि यहां हम १२५-१३० के आसपास है। सब आपस में एकत्र होते मिल जुलकर रहते और एक दूसरे की मदद् करते है। अधिकतर युवक शर्ट, और जींस पहने है। युवतियां टाप और जींस डाले है। एक युवन ने घुटनों तक का कुर्ता पहना हुआ है। किंतु उसके नीचे जींस है। तीन चार युवतियां साड़ी पहने है। बिंदी भी एक दो ने लगा रखी है। सब धडल्ले से हिंदी बोल रहे है। उनकी बात सुनकर ऐसा नहीं लगता कि भारत से लगभग १२ हजार किलोमीटर दूर हम एक दूसरी दुनिया में है। नई दुनियां में।

टांप जींस पहने एक दो युवती ने छोटी ङ्क्षबंदी लगाई है। एक ने काली तो अन्य ने चकमदार। एक युवती हरे रंग की साड़ी पहने है, उसने मांग में बहुत हल्का सिंदूर लगाया है। पूरे गु्रप में ५० के आसपास युवतियां है किंतु शिल्पी के बाद यह पहली युवती मिली जिसने ङ्क्षसदूर लगाया है और पांव में बिछुए पहने है।

यहां की विवाहित इसे त्याग चुकी है। गले में किसी के लाकेट है तो किसी के चेन। मंगलसूत्र मुझे किसी की गर्दन में नजर नहीं आया। एक चीज और सबने मेकअप बहुत कम किया है। लिपस्टिक बहुत हल्के नेचर कलर की ही लगा रखी है।

थोड़ी देर में भोजन शुरू हो जाता है सब लाइन में लगे अपने नंबर पर जाकर भोजन ले रहे है। दावत करने वाले परिवार के सदस्य काउंटर पर खड़े व्यवस्था में लगे है। अंशुल बताता है कि कढ़ी और सब्जी घर की बनी है। क्या क्या है? यह मैं शुरू से ही नहं पहचान पाता। एक दो वस्तु को छोड़कर अंशुल के कहने पर मैं सब्जी लेता हूं। यह आलू से बनी है और उड़द की दाल एक रोटी और एक जगह बैठकर भोजन करने लगता हूं।

धोने ओर सफाई की परेशानी से बचने के लिए सब प्लास्टिक के गिलास और प्लेट प्रयोग करते है। यहां भी प्लास्टिक की प्लेट है। पानी की बहुत छोटी छोटी लगभग २०० से २५० ग्राम की बोतल। सब खाना खा रहे है। बातो में मशगूल है। युवतियां अपने साथ अपने छोटे बच्चों को भी भोजन करा रही है।

अमेरिकन के मियामिसवर्ग में बसे इस छोटे हिंदुस्तान को मैं देख रहा हूं। और इतनी दूर भी अपने वतन की सुगंध और प्यार को महसूस कर रहा हूं।

यहां एक नए तरह के भारत को देख रहा हूं। जो जीवन यापन की विवशता में अपने परिवारों और वतन से इनती दूर है पर अपनी सादगी अपने वतन की खुशबू को अभी तक नहीं भूला है।

 

२८ फरवरी।

 

२६ को पूरे दिन बारिश पड़ती रही। रात में भी बारिश हुई। बहुत मामूली सी बर्फ गिरी। कल दुपहर से हल्की हल्की बर्फ गिरन लगी। ऐसा लगता जैसे कोई हार सिंगार के वृक्ष को धीरे धीरे हिला रहा हो। उसके सफेद फूल धीर धीरे हवा में लहराते, घूमते जमीन पर आकर गिर रहे हो। दुपहर से आज प्रात: तक यह सिलसिला जारी रहा। सबेरे जो उठा तो देखता क्या हूं कि दूर दूर तक खूबसूरत नजारा है। प्रकृति ने सफेद कालीन की चादर सारे में बिछाई हुई है। छोटे पौधो के ऊपर सफेद कवर फेला नजर आ रहा था। बड़ वृक्षों को देखने से लगता था कि उनकी पत्तियों की जड़ में रूई के छोट छोटे गोले उग आए है। मकानो की ढालदार छते भी सफेद कालीन से ढकी थी। खुले में खड़ी कार पर भी प्रकृति ने श्वेत कवर चढ़ा दिया था। बड़ा खूबसूरत दृश्य था। हां झील का पानी वैसा ही था। पिछले दिनों इस पर भी सफेद चादर बर्फ की छा गई थी वह इस बार नहीं छाई थी।

झील में कोनेडियन गीज और बत्तखें वैस ही तैर रही थी। जैसे बारिश होने से पूर्व तैरती थी। बारिश ठंडी हवा और बर्फ के कारण हम एक माह से यहां कमरे में बंद है। दरवाजा खोलते भी डर लगता है और प्रकृति ने उन्हें इस योग्य बनाया है कि वे इतने खराब मौसम में भी पानी में घूम सके और अपना भोजन तलाश सकें।

हम इंसान तो अपना भोजन घर के अंदर तैयार कर लेते है अंदर बंद होकर भी पेट भर लेते है। इन पक्षियों के लिए किसी ने भोजन का प्रबंध करके रखा नहीं। ये भविष्य ने लिए जोड़कर भी नहीं रखती। ये तो अपने पेट की मांग पर पानी या घास में से जरूरत का सामान खोज लेती है। अच्छा है ये भविष्य के लिए भोजन संग्रह नहीं करती। वरना लालची इंसान इनके एकत्र भोजन को लूटकर खा लेता। इंसान से पहले तो लुटेरी प्रजाति के दूसरे प्राणी, चुंहे, बिल्ली कुत्ते आदि इनके भोजन के चट करने में गुरेज नहीं करते। मैं इन बत्तखों और गीज के इस मौसम में भी सक्रिय होने से प्रफुलित हंू कि वे इतने खराब मौसम में भी सक्रिय है। उन्होंने अपने को पर्यावरण के अनुकूल बना लिया है।

आज दुपहर लगभग दस बजे से हल्की बारिश होनी शुरू हुई और शाम चार बजे तक धरती और भवनों की छतों पर फैली बर्फ गायब हो चुकी थी।

जय शंकर प्रसाद ने कामायनी में कहा है-

हिमगिरी के उतंग शिक्षा पर

बैठ शिला की शीतल छांह

एक पुरूष भीगे नैनों से

देख रहा था प्रलय प्रवाह।

ऊपर हिमश, नीचे अ...

एक ताल था, एक सघन

एक तत्व की प्रधानता

कहीं इसे जड़ या चेतन

धीरे धीरे हिम आच्छादन

हटने लगा धरातल से

जाग उठी सोती वनस्पतियां

मुझे धोती शीतल जलसा।

प्रकृति का अजीब करिश्मा है, पानी से ही बर्फ बनता है तापमान के गिरने पर पानी बर्फ में तब्दील हो जाता है और बढऩे पर बारिश में बदल जाता है। अधिकांश में बादलों से तामपान की कमी और बढ़ोत्तरी कभी जल की बृदो में बदल जाती है तो कभी बर्फ के रूप में एक ही वस्तु।

प्रकृति की अजीब माना है प्रकृति के संचालन को तो किसी ने नहीं छोडा़ किंतु देखकर लगता है कि कोई चित्रकार है। तो अपनी तूलिया से अलग अलग ....से अलग अलग तरह के चित्र बनाता रहता है। कल आज सबेरे तक उसने पूरी पृथ्वी को सफेद कालीन से सजाया हुआ था और कुछ ही घंटो में उसे साफ कर दिया। इसी तरह जैसे हम समारोह के लिए मंडप सजाते है और समारोह बीतते ही मंडल की सजावट हटा देते है।

प्रकृति नेे भी धरती को सजाया किसके लिए पता नहीं किंतु अब उस सजावट को खत्म कर ......पुराने रूप में ला दिया।

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